google.com, pub-2645916089428188, DIRECT, f08c47fec0942fa0 Aapkedwar Delhi News : धर्म संस्कार
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हिंदू नव वर्ष श्री विक्रम संवत् 2082 वर्ष के राजा एवं मंत्री सूर्य होंगे

 जल स्तंभ  85.37 प्रतिशत वर्षा अच्छी होगी

हिंदू नव वर्ष श्री विक्रम संवत् की शुरुवात चैत्र कृष्ण अमावस्या  तिथि की समाप्ति 29 मार्च दिन में 04:26 बजे पर होगी इस के साथ ही चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि आरंभ होगी इसी समय से चंद्रमान से हिंदू नव वर्ष श्री विक्रम संवत् 2081 समाप्त होकर श्री श्री विक्रम संवत् 2082 प्रारंभ हो जायेगा।

नव रात्रि घट स्थापना 30 मार्च  रविवार को प्रातः सूर्योदय  06:11 बजे से 10:18 बजे तक फिर अभिजीत मुहूर्त में 11:57 12:47 के बीच श्रेष्ठ है। इस दिन सभी को प्रातः जल्दी उठकर स्नान ध्यान करके साफ नए वस्त्र पहन कर अपने अपने घरों पर ध्वज फहराना चाहिए और वर्ष भर उन्नति के लिए ईश्वर से पूजन ,प्रार्थना,अपने अपने धर्मानुसार अवश्य करना चाहिए ।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने जानकारी बताया 

इस बार श्री विक्रम संवत्सर 2082 का नाम सिद्धार्थी है स्वामी सूर्य है जनता में ज्ञान वृद्धि करता है।

इस वर्ष 04 स्थान सौम्य ग्रहों को और 06 स्थान पाप और  उग्र ग्रहों को प्राप्त हुए हैं।इस वर्ष का जल स्तंभ 85.37% होने से वर्षा की अधिकता रहेगी अनेक स्थानों पर बाढ़ का खतरा रहेगा जिससे फसलों को हानि होगी।

तृण स्तंभ 100% होने से पशु चारा भरपूर होगा। वायु  स्तंभ 10.75% होने से वातावरण में वायु की गति कम रहेगी इससे उमस रहेगी मच्छर,कीड़े मकोड़े का प्रकोप बढ़ेगा। अन्न स्तंभ 21.69% है जो कि कम है अनाज उत्पादन की कमी दर्शाता है अधिक वर्षा से अनाज की फसल नष्ट होने से उनके मूल्य वृद्धि रहेगी । गेहूं,चना, जौ,चावल के मूल्य ऊंचे रहेंगे।

*वर्ष के दशाधिकारियों के फल* :--  जैन के अनुसार 1. वर्ष का राजा सूर्य होने से अनेक स्थानों पर वर्षा की कमी, मनुष्य व पशुओं में रोग ,अग्नि व चोरी की घटनाएं बढ़ेगी किसी वरिष्ठ  शासक या नेता का निधन।

2. मंत्री सूर्य का फल - शासकों में आपसी विरोध आरोप प्रत्यारोप बढ़ेगा रोग,चोरी भय गुड़ और रसादि पदार्थों के मूल्य वृद्धि रहेगी।

3. सस्येश बुध  का फल - ग्रीष्म ऋतु की फसलें गेहूं,चावल,गन्ना इत्यादि भरपूर  उपज होती हैं वर्षा अधिक होती है सुख साधनों की वृद्धि विद्वान धर्म पारायण प्रवृत्ति रहे।

4. धान्येश चंद्रमा का फल - सर्दियों में होने वाली फसलें मूंग, मोठ , बाजरा,सरसों आदि  अच्छी हो दूध पर्याप्त मात्रा में होता है जनसंख्या में वृद्धि हो।

5. मेघेश सूर्य का फल - वर्षा कम होगी महंगाई चरम पर होगी राजनीतिज्ञों में आपसी विरोध चरम पर चोरी ठगी, भ्रष्टाचार बढ़ेगी गेहूं,चना, जौ चावल,गन्ना की फसलों अधिक होगी।

6. रसेश शुक्र का फल - शुभ,मांगलिक, धार्मिक आयोजन अधिक होते है कुछ स्थानों पर वर्षा की कमी।गुड़,खांड,रसकस ज्यादा हो शासक  वर्ग सुचारू रूप से चलता है।

7.  नीरसेश बुध का फल -  रोज मर्रे की वस्तुएं  रेडीमेड कपड़े होजरी का सामान,शंख,चंदन,सोना,चांदी, तांबा आदि धातुएं,रत्न महंगे होते हैं। 

8. फलेश शनि का फल पेड़ो में फलों की कमी। शीत प्रकोप, हिमपात से हानि रोग,चोरी से जनता की परेशानियां बढ़ेगी।

9. धनेश  मंगल का फल - गेहूं, चना,  धान्य आदि की फसलें असमय वर्षा से खराब होती हैं।व्यापार में उतर चढ़ाव विशेष प्रशासन से जनता दुःखी हो।

10. दुर्गेश शनि का फल - पश्चिमी देश प्रांतों में हिंसा अशांति से जनता त्रस्त रहकर अन्य स्थानों पर पलायन करती हैं।नागरिकों को शत्रु भय । टिड्डी ,चूहों से फसलों की हानि होती हैं।

सूर्य के रथ खींचने लगे खर , नहीं होंगे विवाह आदि शुभ कार्य


भारतीय संस्कृति प्रकृति के साथ ऋतुओं के साथ जुड़ी हुई गुथी हुई हैं। इस वजह से व्यवहारिक कार्यों को त्यौहार, मुहूर्तों से करने के विधान शास्त्रों में निहित है।

ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि खर मास साल में दो बार आता है । जब जब सूर्य  गुरु की राशि में धनु और मीन में गोचर करते हैं वह अवधि को खरमास के नाम से जाना जाता है। खरमास की अवधि 30 दिन की होती है धनु खरमास  और मीन खर मास प्रारंभ हो चुका I   

धनु खरमास 15 दिसंबर की रात्रि 22:09 बजे से सूर्य ने धनु राशि में प्रवेश किया है यह 14 जनवरी को प्रातः 8:00 बज कर 54 मिनट तक रहेगा  धनु राशि में रहने से सौर पौष धनु खरमास रहेगा।  

 सूर्य देव के रथ को निरंतर सात घोड़ों द्वारा खींचा जाता है। लगातार घोड़े का रथ में चलने से घोड़े को थकान हो जाती है और उनको थोड़ा विश्राम के लिए छोड़ दिया जाता है ।इस अवधि में सूर्य का रथ लगातार चलने के कारण उसमें खर यानी गधों को रथ में जोत दिया जाता है यह 30 दिन तक खर यानी गधे रथ को धीमी गति से  खींचते हैं इस  वजह से खरमास में सूर्य का तेज कम हो जाता है सूर्य की  चाल काफी ज्यादा धीमी हो जाती है  इसलिए खरमास में शादी विवाह गृह प्रवेश देव प्रतिष्ठा मुंडन  आदि शुभ, मंगल कार्य को शास्त्रों के अनुसार वर्जित रखा जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इस अवधि में शुभ मंगल कार्यों के करने से उनका सुख उनका  पूरा फल नहीं मिल पाता इसलिए इस समय धार्मिक कार्य  आदि करना चाहिए।

जैन ने बताया खरमास और मलमास में अंतर होता है खरमास सूर्य के धुन और मीन राशि में प्रवेश करने से हर वर्ष में दो बार आता है जबकि मलमास 3 वर्ष में एक बार आता है। 

 चंद्रमा को पृथ्वी के 12 चक्कर लगाने में 355 दिन का समय लगता है पृथ्वी को सूर्य का चक्कर लगाने में 365 दिन का समय लगता है इस तरह हर साल चंद्र वर्ष और सूर्य वर्ष में लगभग 10 दोनों का अंतर आ जाता है इसी अंतर को दूर करने के लिए अधिक मास या पुरुषोत्तम मास की व्यवस्था की गई है ताकि व्रत, त्यौहार निश्चित ऋतु में मनाई जा सके अगर ऐसा ना हो तो सभी  त्योहारों के और रितु परिवर्तन समय में काफी अंतर आ सकता है।

बाबा की नेतागिरी पर बाबाजी की सीख

 

मै धीरेन्द्र शास्त्री को कभी गंभीरता से नहीं लेता। धीरेन्द्र अभी हमारी नजर में ' बाबा '[बच्चा] ही है ,लेकिन कुछ बच्चे समय से पहले परिपक्व हो जाते हैं ,इसलिए पढ़ाई-लिखे के बजाय  बाबागिरी पर उतर आते हैं। धीरेन्द्र शास्त्री भी उन्हीं बच्चों में से एक है।  उनके सितारे अभी बुलंद हैं और इसी के आधार पर वे हिन्दू हृदय सम्राट बन जाने की जल्दबाजी में है।  उन्हें धूर्त राजनीतिज्ञों ने अपने स्वार्थ के लिए हिन्दू हृदय सम्राट बनाने में कोई कसर छोड़ी भी नहीं है ,लेकिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने सही समय पर बाबा धीरेन्द्र  को सही तरीके से डपट दिया।
धीरेन्द्र शास्त्री पर लिखने का   मेरा कोई मन नहीं था,लेकिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानद बोले तो मुझे भी लिखना पड़ा ।  बाबा धीरेन्द्र ने हाल ही में सनातन हिन्दू एकता यात्रा निकाली ।  इस यात्रा में खूब भीड़ उमड़ी  ।  तमाम बाबा इसमें शामिल हुए ।  इनमें फ़िल्मी दुनिया के बाबा और कथावाचक बाबा भी शामिल हुए। बेरोजगारों की  भीड़ को तो इसमें शामिल  होना ही था। बाबा ने सड़क पर चुकट्टों में चाय सुड़ककर आम आदमी होने का खूब तमाशा किया। मीडिया के लिए बाबाओं की ये बाबागीरी बड़े काम की साबित हुई । टीवी चैनलों को अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए ऐसे ही तमाशों की जरूरत होती है। बाबाओं को पैसे देकर फ़िल्मी बाबा भी बुलाने पड़ते हैं। वरना फ़िल्मी बाबा ' चिरी ऊँगली पर न मूतें '।  
बहरहाल बात हम शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानद जी की कर रहे हैं। अविमुक्तेश्वरानद भी कांग्रेसी शंकराचार्य के रूप में बदनाम स्वामी स्वरूपानंद  सरस्वती जी के उत्तराधिकारी है।  वे अयोध्या के  राम मंदिर  में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भी नहीं गए थे , मुकेश अम्बानी के बेटे की शादी में गए थे ।  लेकिन उन्होंने फिर भी एक मार्के की बात कही है कि बाबा धीरेन्द्र शास्त्री राजनीतिक शक्ति के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं।  हम भी यही सब कहते तो हमें शहरी नक्सल या वामपंथी कहकर अनसुना करने की कोशिश की जाती ,लेकिन जब यही बात एक शंकराचार्य जी कह रहे हैं तो उसका कुछ महत्व बनता है। शास्त्री के मुकाबले शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को हैसियत बड़ी है।
बाबा धीरेन्द्र शास्त्री ,जिन्हें बुंदेलखंड के धर्मभीरु लोग बागवश्वर बाबा कहते हैं , अपनी यात्रा के आरम्भ से अंत तक उत्तर प्रदेश के बाबा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का चुनाव मंत्र ' बटोगे तो कटोगे ' का जाप करते आये।  उन्होंने अपने आपको प्रगतिशील बताने के लिए जाति-पांत का भी विरोध किया ,लेकिन बाबा धीरेन्द्र   शास्त्री उन बाबाजी के शिष्य हैं जो जाति-पांत में अखंड भरोसा रखने वाले स्वामी रामभद्राचार्य जी के शिष्य हैं। इसलिए सभी को पता है कि धीरेन्द्र के मन में जाति-पांत की जड़ें कितनी गहरी हैं ? उनके गुरु तो ब्राम्हणों में भी ऊंच-नीच की बात करते हैं। बाबा धीरेन्द्र को सबसे पहले अपने गुरूजी को जाति-पांत की बीमारी से मुक्त करना चाहिए था। लेकिन बाबा तो बाबा होते हैं। बर्र और बालक का एक जैसा स्वभाव होता है। बाबा धीरेन्द्र भी शास्त्री कम, बर्र ज्यादा हैं। ' बर्र ' समझते हैं न आप ? बुंदेलखंड और अवध में ' बर्र ' एक ऐसा कीट है जो बहुत आक्रामक होता है ।  आदमी पर टूट पड़े तो जान तक ले ले।  अभी हाल हमें शिवपुरी में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके भक्तों पर हमला कर दिया।
मजे की बात ये है कि  एक तरफ बाबा [बालक ] धीरेन्द्र शास्त्री जाति-पांत की मुखालफत कर रहे हैं तो दूसरी तरफ शंकराचार्य अवमुक्तेश्वरानद का कहना है कि  यदि जाति ही समाप्त हो गयी तो फिर हमारी पहचान ही समाप्त हो जाएगी ।  सनातन ही समाप्त हो जाएगा ,जाति है तो ही हम सनातन हैं। अब पहले बाबा धीरेन्द्र शास्त्री को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानद से ही शास्त्रार्थ कर लेना चाहिए। जो जीतेगा ,लोगउसकी बात मान लेंगे। इस शास्त्रार्थ में एक और ठठरी बाँधने वाले बाबा धीरेन्द्र शास्त्री होंगे और दूसरी और गठरी बांधकर चलने वाले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानद। कितना मोहक दृश्य होगा। आपको याद होगा कि  शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानद पहले भी बाबा धीरणेद्र शास्त्री से जोशी मठ को धंसने से रोकने की चुनौती दे चुके हैं।
वैसे हमारे यहां कहते हैं कि  - कांटे से ही काँटा निकलता है। ठीक उसी तरह बाबा की काट बाबा ही हो सकता है। बाबा धीरेन्द्र शास्त्री को पहली बार शंकराचार्य बाबा मिले हैं ज्ञान देने के लिये ।  आप कह सकते हैं कि  बाबा ऊँट पहली बार पहाड़ के सामने आया है। बाबा धीरेन्द्र शास्त्री की मेहनत को देखते हुए मै तो भाजपा हाईकमान को मश्विरा दूंगा कि  बाबा धीरेन्द्र शास्त्री को अविलम्ब यूपी या एमपी की कमान सौंप दिया जाना चाहिए। भाजपा को राजकाज के लिए बाबाओं की ही तो जरूरत है। वैसे भी भाजपा हाईकमान ने अपने आधे से ज्यादा नेताओं को  बाबा बना ही दिया है,जनता को बाबा बना   दिया है।  ।  बेचारों के पास भोजन और भजन करने के अलावा कोई दूसरा काम है ही नहीं।  सारा काम -तमाम तो मोदी -शाह की जोड़ी पहले से कर ही रही है।
बाबा धीरेन्द्र शास्त्री की प्रतिभा का देश कायल है। भाजपा कायल है । कमलनाथ कायल हैं,दिग्विजय सिंह कायल है।  संजय दत्त कायल हैं ,लेकिन हम कायल नहीं तो इसी उनकी सेहत पर क्या फर्क पड़ता है ।  शास्त्री की प्रतिभा से हमारे देश के ए-वन यानी मुकेश अम्बानी भी कायल है ।  अम्बानी ने अपने बेटे की शादी में धीरेन्द्र   को बुलाने के लिए अपनी चीलगाड़ी  [हवाई जहाज ] तक भेजी थी। बाबा धीरेन्द्र को प्रदेश की सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराकर वीआईपी बना ही दिया है। लेकिन बाबा असल में हैं हमारी ही तरह एक बुंदेलखंडी। हम बुन्देलखंडियोंके बारे में एक कहावत है की सौ डंडी और एक बुंदेलखंडी बराबर होता है। इसलिए दुसरे बाबाओं को धीरेन्द्र से सावधान होना चाहिए।  मै बाबा धीरेन्द्र की सनातन हिन्दू यात्रा का तो समर्थक नहीं हूँ लेकिन यदि वे हमारे साथ पृथक बुन्देखण्ड   राज्य आंदोलन का समर्थन करने के लिए कोई पदयात्रा निकालें तो हम उनको अपने  साथ ले सकते हैं।
बाबा धीरेन्द्र शास्त्री ने कोई एक सौ किलोमीटर की पदयात्रा की है और इसी में फसूकर डाल दिया। उनके पांवों में फलका [छाले ] पड़ गए, बुखार आ गया ,जबकि हम जैसे लोग दो-दो बार 200  किमी की यात्रा कर चुके हैं वो भी बिना हो -हल्ला किये। हमारी ग्वालियर से करौली तक की यात्रा में हम थे ,हमारे मित्र थे और रिश्तेदार थे। हम हिन्दू जागरण के लिए नहीं बल्कि देवी दर्शन के लिए यात्रा पर थे। बहरहाल बाबा धीरेन्द्र शास्त्री दीर्घायु हो,स्वस्थ्य-प्रसन्न रहे। घरबार बसाये और डॉ मोहन भागवत की बात मानकर दस-पांच बच्चों का पिता बने तो शायद हिन्दुओं का कल्याण हो जाये।
@ राकेश अचल 

उत्पन्ना एकादशी व्रत हस्त नक्षत्र,सौम्य और प्रीति योग में


यूं तो हर माह में दो एकादशी आती है एक कृष्ण पक्ष में दूसरी शुक्ल पक्ष में इस प्रकार पूरे एक वर्ष भर में 24 एकादशी आती है ।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि हर एकादशी तिथि का अपना-अपना महत्व होता है इसी प्रकार उत्पन्न एकादशी का बहुत बड़ा महत्व है।

एकादशी का व्रत  मार्गशीर्ष  माह कृष्ण पक्ष में एकादशी तिथि को व्रत किया जाता है इस व्रत में भगवान श्री कृष्ण जी की, विष्णु जी, लक्ष्मी जी की पूजा का विधान है। व्रत रखने वाले को दशमी तिथि के दिन रात में  भोजन नहीं करना चाहिए  दिन अस्त होने से पहले ही कर लेना चाहिए।

और एकादशी के दिन ब्रह्म बेला में भगवान कृष्ण भगवान, विष्णु और लक्ष्मी जी की पुष्प, जल, अक्षत ,धूप,दीप से पूजन करके पूजा अर्चना प्रार्थना करनी चाहिए। इस व्रत में केवल फलों का ही भोग लगाया जाता है ब्रह्मा विष्णु महेश त्रिदेवों का संयुक्त अंश माना जाता है।इस एकादशी का व्रत   मोक्ष देने वाला व्रत कहा जाता है और अनेक पापों को नष्ट करता है।

 जैन ने बताया कि एकादशी तिथि 25 नवंबर की रात्रि यानी 26 नवंबर को रात 01:01 बजे  पर प्रारंभ होगी और यह 26 नवंबर की रात्रि 27 नवम्बर की रात 03:45 पर समाप्त होगी 26 नवंबर मंगलवार को पूरे दिन उदय काल में यह तिथि हस्त नक्षत्र सौम्य योग और प्रीति योग में रहेगी इसी दिन मंगलवार के दिन उत्पन्ना एकादशी का व्रत होगा इसके दूसरे दिन 27 नवंबर बुधवार को हरी वासर समाप्त होने का समय 10:26 बजे प्रातः है।

इस समय के उपरांत इस व्रत का पारण  करना चाहिए । पारण का  समय दोपहर 01:09 से 03:17 बजे तक रहेगा। पारण को द्वादशी तिथि  समाप्ति होने  से पहले करना अति आवश्यक है।

सनातन धर्म की रक्षा करना हर हिंदू का परम धर्म - पंडित घनश्याम शास्त्री

 

ग्वालियर।बहोड़ापुर स्थित 24 बीघा गालव नगर में आयोजित संगीतमय भागवत कथा में पहले  दिन सुप्रसिद्ध भागवताचार्य पं.घनश्याम शास्त्री जी महाराज ने बताया कि  प्रत्येक व्यक्ति अपने कल्याण के लिए स्वयं ही उत्तरदायी है। व्यक्ति को चाहिए कि वह स्वयं को पहचान कर अपने कल्याण का मार्ग चुने।

शास्त्री जी ने आगे कहा कि सनातन धर्म का संरक्षण और उसकी रक्षा करना हर हिंदू का परम धर्म है। सनातन धर्म, जिसमें आदिकाल से ही मानवता, प्रेम और करुणा का पाठ पढ़ाया गया है, का पालन और रक्षा करना हमारा कर्तव्य है

महाराज जी ने कहा कि यदि धर्म की रक्षा के लिए बलिदान देने की आवश्यकता हो, तो इसे भी हंसते-हंसते स्वीकार करना चाहिए। क्योंकि हमारे पूर्वजों ने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है, और यही मार्ग हमें भी दिखाता है कि धर्म की रक्षा के लिए हम किसी भी प्रकार के त्याग के लिए तैयार रहें इस अवसर पर कथा परीक्षित वर्षा मुनेश श्रीवास्तव, विनोद भार्गव, जिला महामंत्री भावना जालौन मुरैना,हरिओम शर्मा ने भागवत जी की आरती की।

कार्तिक पूर्णिमा 15 नवम्बर को

धार्मिक दृष्टि से अति महत्व पूर्ण दिवस

कोई कोई महीना ,दिन, तिथि स्नान, दान,धर्म करने की दृष्टि से बड़ा महत्व पूर्ण होता है कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा का दिन भी इस दृष्टि से विशेष रूप से महत्व पूर्ण है।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा तिथि 15 नवम्बर को प्रातः 06:19 बजे से प्रारंभ होगी और पूरे दिन रहते हुए रात्रि 02:58 बजे तक रहेगी।

उदया तिथि होकर पूरे दिन के समय रहने से कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा तिथि पर गंगा स्नान, दीप दान,अन्य दान आदि का विशेष महत्व रहेगा।

इस दिन अनेक पर्व रहने से त्रिदेवों ने इसे महा पुनीत पर्व कहा है।

इस दिन ही कार्तिक स्नान का आरंभ जो शरद पूर्णिमा से हुआ उसका समापन होता है। देव  प्रबोधिनी एकादशी से आरंभ होने वाले तुलसी विवाह उत्सव का समापन भी कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा तिथि को होता है इसी दिन तुलसी देवी और शालिग्राम के विवाह अनुष्ठान का आयोजन । भीष्म पंचक व्रत जो देव प्रबोधिनी एकादशी से आरंभ होता है उसका समापन होता है। एक दिन पूर्व  14 नवंबर को वैकुंठ चतुर्दशी व्रत पूजन किया जाता है।

कार्तिक शुक्ल पूर्णिमा तिथि को देव दीपावली भी मनाई जाती है जिसे देवताओं के दीपावली उत्सव के रूप में जाना जाता है शिव जी द्वारा त्रिपुरा नामक राक्षस को परास्त करने से इसे त्रिपुरी या त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

इस दिन जैन समाज द्वारा अष्टांहिक पर्व कार्तिक शुक्ल अष्टमी से जगह जगह हर शहर में चल रहे होते है उन अष्टांहिक विधान पर्व का समापन भी इसी दिन किया जाता है।

जैन ने कहा कि इस दिन गांग जी में या सरोवर में  स्नान नहीं कर सकते तो  घर पर ही गंगा जल युक्त जल से स्नान व्रत,दान,मंत्र जाप पाठ अवश्य करना चाहिए।

देवउठनी एकादशी से फिर शुरू हो जाएंगे विवाह

 केवल एक ही शुद्ध विवाह मुहूर्त

धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है यह भगवान विष्णु को समर्पित है कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में देवठान एकादशी व्रत रखा जाता है कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को ही देव उठानी एकादशी कहते हैं इसे प्रबोधिनी एकादशी या देवोत्थान एकादशी नाम से ही जाना जाता है।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य हुकुमचंद जैन ने बताया कि इस बार देवउठनी एकादशी 12 नवंबर मंगलवार को है मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से 4 महीने बाद जागते हैं और सृष्टि का फिर से संचालन करते हैं। आषाढ शुक्ल एकादशी बुधवार  17 जुलाई के दिन  भगवान विष्णु योग निद्रा में चले गए थे और अब कार्तिक शुक्ल एकादशी 12 नवंबर मंगलवार के दिन जागरण होगा। जाइसलिए इस दिन से ही चातुर्मास काल  भी समाप्त होगा और विवाह गृह प्रवेश आदि शुभ मंगल कार्यों की शुरुआत हो जाएगी । 

 देव उठानी एकादशी का शुभ मुहूर्त:-  

 एकादशी तिथि 11 नवंबर को शाम 06:40 बजे से आरंभ होगी और एकादशी तिथि का समापन 12 नवंबर को शाम 04:04 पर होगा।

 देव उठानी एकादशी पर बना रहे हैं कुछ शुभ योग:- जैन ने कहा  देव उठानी एकादशी मंगलवार को  इस वर्ष रवि योग , सर्वार्थ सिद्धि योग जैसे शुभ संयोग भी बना रहे हैं पंचांग में इन योगों को अत्यंत शुभ और लाभदायक माना गया है ।

रवि योग सुबह 06:40 से 07:52 तक रहेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 07:52 से दूसरे दिन 05:50 तक रहेगा।

 पूजन के शुभ मुहूर्त प्राप्त है 05:21 से 06:41 तक 

अभिजीत दोपहर 11:43 बजे से 12:36 बजे तक विजय मुहूर्त दोपहर 01:00 बजे  से 02:35 बजे तक 

गोधूलि बेला  शाम 05:28 से 05:54 तक संध्या 05:58 बजे  से 06:45 बजे तक रहेंगे। एकादशी पारण का दिन 13 नवंबर बुधवार को  सुबह पारण का समय 06:42 से 08:51 बजे तक रहेगा।

*विवाह मुहूर्त*:-

जैन ने कहा कि इस बार 15 जनवरी 2025 तक देव उठानी एकादशी के अबूझ मुहूर्त को छोड़कर एक या दो ही शुद्ध विवाह मुहूर्त है अन्य विवाह मुहूर्त  दोष सहित अशुद्ध मुहूर्त है।

शुद्ध विवाह मुहूर्त :- नवंबर में केवल 22 नवंबर 

दिसंबर में  केवल 02 दिसंबर ही है। फिर सीधे जनवरी 25 में है।

जनवरी 25 में- 16,17,18,21,22

फरवरी में - 071,13,14,18,20,21,25

मार्च 25 में - 05,06

अप्रैल 25-14,16,18,19,20,25,29,30, 

मई  25-  05,06,07,08,17,28

जून 25 - 01,02,04,07,08

 फिर सीधे नवंबर 2025 में 22,23,25,30

दिसंबर 25 में 04,11,12, है।

अशुद्ध विवाह मुहूर्त :-

नवंबर 2024 में 16,17,25,26,27,28 है। दिसंबर 2024 में 04,08,09,10,13,14 है।

दीपावली ,महालक्ष्मी पूजन 1 नवम्बर स्वाति नक्षत्र, गद योग में शुभ रहेगा

दीपावली महालक्ष्मी पूजन को लेकर पूरे देश में विद्वानों की अलग-अलग राय चल रही है इस बार अधिकतर त्यौहार तिथियों के फेर में बने रहे।

आइए जाने  दीपावली, लक्ष्मी जी का पूजन 31 अक्टूबर को करे अथवा 1 नवंबर शुक्रवार  को पूजन करना श्रेष्ठ है।

वरिष्ठ ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ने जानकारी देते हुए कहा की 31 अक्टूबर को अमावस्या तिथि 15:52 पर प्रारंभ होगी और 01 नवंबर शुक्रवार को शाम को 6:16 तक रहेगी इसलिए संपूर्ण भारत में 31 अक्टूबर की प्रदोष व्यापिनी है परंतु शास्त्र इस संदर्भ में कहते हैं।  01 नवंबर को स्वाति नक्षत्र सूर्योदय से रात्रि 3:30 तक रहेगा। शुक्रवार को स्वाति नक्षत्र होने से गद योग बन रहा है। साथ ही दिन के 10:40 बजे से आयुष्मान योग रहेगा। 01 नवंबर को अमावस्या तिथि उदय व्यापिनी  होने के साथ साथ प्रदोष को भी स्पर्श कर रही है।

 प्रदोष समय में दीपदान ,लक्ष्मी पूजन करना चाहिए अमावस्या तिथि पहले दिन और दूसरे दिन दोनों दिन ही प्रदोष व्यापिनी हो तो दूसरे दिन वाली अमावश्या में ही लक्ष्मी पूजन करना शास्त्र सम्मत है। प्रतिपादक ग्रहण करना चाहिए। निर्णय सिंधु के प्रथम परीक्षित के प्रश्न 26 पर निर्देश है कि जब तिथि दो दिन कर्मकाल में विद्यमान हो तो निर्णय युगमानुसार अनुसार करें इस हेतु अमावस्या प्रतिपदा का युग्म शुभ माना गया है ।अर्थात अमावस्या को प्रतिपदा युता ग्रहण करना महाफलदायक होता है और लिखा भी है पहले दिन चतुर्दशी होता अमावस्या ग्रहण करें तो महादोष है और पूर्व के किए पुण्य को नष्ट करने वाली होती है दीपावली निर्णय प्रकरण में धर्म सिंधु में लेख है कि  सूर्योदय में व्याप्त होकर अस्तकाल के उपरांत एक घटिका  से अधिक व्यापिनी अमावस्या होवे तब संदेह नहीं करना चाहिए इस अनुसार 01 नवंबर को दूसरे दिन सूर्योदय में व्याप्त होकर सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में एक  से अधिक अमावस्या विद्यमान है निर्णय सिंधु के द्वितीय   परिच्छेद के पृष्ठ तीन सौ पर लेख है कि  यदि अमावस्या दोनों दिन प्रदोष व्यापिनी होवे तो   अगली करना।

 कारण की तिथि तत्व में ज्योतिषी का कथन है एक घड़ी रात्रि का योग होवे तो अमावस्या दूसरे दिन होती है तब प्रथम दिन को छोड़कर अगले दिन सुखरात्रि होती है।

 तिथि निर्णय का कथन उल्लेखनीय है कि अमावस्या दोनों दिन प्रदोष को स्पर्श न करें तो दूसरे दिन ही लक्ष्मी पूजन करना चाहिए इसमें यह अर्थ भी अंतर्निहित है कि अमावस्या  दोनों दिन स्पर्श करें तो  लक्ष्मी पूजन दूसरे दिन हीं करना चाहिए 

 व्रत पर्व विवेक में दीपावली के संबंध में अंत में निर्णय प्रतिपादित करते हुए लिखा है कि अमावस्या के दो दिन प्रदोष काल में व्याप्त / अव्याप्त होने पर दूसरे दिन लक्ष्मी पूजन होगा इस प्रकार उपरोक्त सभी प्रमुख ग्रंथो का साथ यह है यदि अमावस्या दूसरे दिन प्रदोष काल में एक घाटी से अधिक व्याप्त है तो प्रथम दिन प्रदोष   में संपूर्ण व्याप्ति को छोड़कर दूसरे दिन प्रदोष काल में श्री महालक्ष्मी पूजन करना चाहिए किंतु कहीं भी ऐसा लेख नहीं मिलते  कि दो दिन प्रदोष में व्याप्ति है तो अधिक व्याप्ति वाले प्रथम दिन लक्ष्मी पूजन किया जाए ।

प्रतिपदा युता अमावस्या ग्रहण किए जाने का युग्म का जो निर्देश है उसके अनुसार भी प्रदोष काल का स्पर्श मात्र ही पर्याप्त है यदि एक घटी से कम व्याप्ति होने के कारण प्रथम दिन ग्रहण किया जाता है तो वह युग्म व्यवस्था का उल्लंघन होकर महादोष  कारक है पंचांग कर्ताओ के मत के अनुसार राजधानी पंचांग, ब्रजभूमि पंचांग, मध्य प्रदेश में सर्वाधिक चलने वाला निर्णय सागर पंचांग, राजस्थान का शिव शक्ति  पंचांग आदि पंचांग में भी एक नवंबर को दीपावली पूजन मुहूर्त का उल्लेख किया है।

सबसे सरल सूत्र जिन शहरों में सूर्यास्त शाम को 05:52 के बाद होगा उन में अमावस्या तिथि सूर्यास्त अनन्तर एक घटी  से  कम होने के कारण 31 को कर सकते हैं ऐसे शहर भारत के व मुश्किल से 7 % शहर आयेंगे शेष दिल्ली,हिमाचल प्रदेश,हरियाणा, उत्तर प्रदेश,मध्यप्रदेश ,झारखंड, मेघालय,बांग्लादेश, कोलकाता उड़ीसा,तेलंगाना,जयपुर,

ग्वालियर,झांसी,आदि अनेक शहर 90 % भारत के शहरो में 01 नवंबर को दिवावली पूजन करना शास्त्र सम्मत है।

एक मानचित्र से भी समझे। 


ज्योतिषाचार्य डॉ हुकुमचंद जैन ग्वालियर

भारतीय ज्योतिषियों की बलिहारी

 

मेरा ज्योतिष में किंचित क्या रत्ती भर विश्वास नहीं है ,लेकिन मेरे विश्वास करने और न करने से क्या फर्क पड़ता है। देश की बहुसंख्यक जनता का विश्वास तो है ज्योतिष पर। और इसी विश्वास के सहारे देश का कारोबार ,बाजार चलता आ रहा है। ज्योतिषी जब बताते हैं तब हमारे यहां नेता चुनाव में नामांकन पत्र दाखिल करते है।  हम खुद ज्योतिषी के बताये मुहूर्त पर गृह प्रवेश करते है।  और तो और भाँवरें डालते हैं। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण ये है कि हम खरीद-फरोख्त भी ज्योतिषियों द्वारा बताये गए महूर्त के हिसाब से ही करते हैं।

मैंने जब से होश सम्हाला है तब से देखता आ रहा हूँ  कि हमारे भारतीय ज्योतिषी मुहूर्तों के बारे में पूछने पर ही बताते हैं और वो भी दक्षिणा   लेने के बाद।  वे पत्रा /पंचांग तभी खोलते हैं जब चढ़ौती चढ़ा दी जाय।   लेकिन खरीद-फरोख्त के लिए शुभ मुहूर्त बताते हुए ज्योतिषी किसी से कोई दक्षिणा नहीं मांगते । बस बता देते हैं कि कब मकान खरीदना है ,कब सोना-चांदी खरीदना है ,कब वाहन खरीदना है। त्यौहार के मौसम में ज्योतिषी ऐसे -ऐसे दुर्लभ मुहूर्त बताते हैं की जनता बावली हो जाती है। जनता को बाबला कर ये ज्योतिषी बाजार की बल्ले-बल्ले करा देते हैं। एक ही दिन में साल-छह महीने का कारोबार हो जाता है। लगता है कि बाजार कि और ज्योतिषियों कि कोई दुरभि संधि है।

हम उन लोगों में से हैं जो अपना हर काम 'अबूझ  मुहूर्त ' में करते है।  ज्योतिषियों के बताये मुहूर्त के फेर में नहीं पड़ते ,इसीलिए चाहे जितना दुर्लभ मुहूर्त हो हम बाजार की और रुख नहीं करते ।  हालाँकि हमारे घर में दूसरे लोग नजर बचाकर बाजार से खरीदारी कर लेते हैं लें हम धनतेरस को भी चम्मच/ घंटी से ज्यादा कुछ नहीं खरीदते। खरीदना भी नहीं है क्योंकि ज्योतिषी तो साल में दस बार दुर्लभ मुहूर्त बताते है।  यदि उनके हिसाब से खरीदारी करने लगे तो घर का बजट ही फेल हो जाये।

अब इस साल ही देख लीजिये। ज्योतिषियों ने कहा है की इस साल 24  अक्टूबर को जो दुर्लभ मुहूर्त बना है वो आज से 752  साल पहले बाना था। कमाल की बात है न कि जब दुनिया में कम्प्यूटर नहीं जन्मा था तब भी हमारे ज्योतिषियों का गुणा-भाग चलता था और उन्हें आज भी कम्प्यूटर नहीं बल्कि उनका अपना पत्रा/ पंचांग ही सैकड़ों साल पुराने मुहूर्त के बारे में बता देता है। मुझे कभी-कभी लगता है कि देश की असली सेवा हमारे ज्योतिषी ही करते हैं ,लेकिन कभी-कभी इनके ऊपर शक भी होता है , क्योंकि ये ज्योतिषी आजतक ये नहीं बताये कि देश के ' अच्छे दिन कब आएंगे ?

आपको बता दूँ कि मै जिस शहर में रहता हूँ वो एक बड़े गांव जैसा ही ह। महाराजाओं का शहर है। यहां न सिटी बस है और न मेट्रो रेल।  लेकिन वहां भी इस मुहूर्त के फेर में एक दिन में एक हजार वाहनों की खरीद हो गयी ।  मकान खरीदने वालों को मुहूर्त के हिसाब से रजिस्ट्री करने के लिए मुंह-मांगी रिश्वत देने के लिए मजबूर होना पड़ा। क्या पता कि मुहूर्त निकलने के बाद खरीदारी लाभप्रद हो या न हो। हमारे यहां आदमी धर्मभीरु   ही नहीं ज्योतिष-भीरु भी है। ज्योतिषी नट की तरह देश की सीधीसादी  जनता को अपने इशारे पर नचाते हैं। जनता  कभी नहीं सोचती   कि ये दुष्ट ज्योतिषी उनके भले के लिए नहीं बल्कि बाजार के भले के लिए ख़ास मुहूर्त निकलकर अखबारों में ,टीवी चैनलों पर दिखाते हैं। जनता तो ठहरी आँख की अंधी  और नाम नयनसुख वाली। अपने दिमाग की खिड़कियां और दरवाजे कभी खोलती ही नहीं।चाहे चुनाव हो या भागवत कथा।  देश की जनता कभी इन ज्योतिषियों से पूछती ही नहीं कि दुर्लभ योग में उन्होंने अपने लिए क्या खरीदा ?

ज्योतिषी बड़े चतुर  -सुजान होते हैं।  जनता को किश्तों में उलूक बनाते हैं। इस साल  उन्होंने वृषभ ,कन्या और तुला राशि के जातकों को चुना। कहा कि इन राशियों के लोग यदि 752  साल बाद पड़ने वाले दुर्लभ योग का लाभ उठाना चाहते हैं जो हनकर यानि जमकर दरियादीली से खरीद-फरोख्त करें ।  ईडी ,सीबीईआई की फ़िक्र न करें।

चूंकि ये मुहूर्त केवल हिन्दू पंचांगों में से निकलते  हैं इसीलिए ये हिन्दुओं के लिए ही शुभ होते है।  मुसलमान,ईसाई या दूसरे धर्मों के लोगों के लिए नहीं।  हामिद  को तो आज भी अपनी अम्मी के लिए बाजार से चिमटा ही खरीदना पड़ता है। देश के 85  करोड़ लोग तो उस मुहूर्त को ही शुभ मानते हैं जिस  दिन उन्हें पांच किलो मुफ्त का अन्न मिलता है।  लाड़ली बहिनों के लिए तो केवल वो मुहूर्त शुभ होता है जिस दिन उनके खाते में सरकार 1250  रूपये राखी बंधन के नेग के रूप में डाल देती है।

हमारा दुर्भाग्य ये है कि हम लोग चाहकर भी इन ज्योतिषियों की भविष्यवाणीयों को चुनौती देने देश की किसी छोटी या बड़ी अदालत नहीं जा सकता ।  जैसे-तैसे पहुँच भी जाएँ तो वहां हमें सुनेगा कौन ? अदालतों में भी तो आखिर धर्मभीरु/ मुहूर्त   प्रेमी लोग ही विराजते हैं। हमारे देश के मुख्यन्यायाधीश ने खुद रहस्योद्घाटन किया कि वे जब भी किसी बड़े मामले में फैसला करने वाले होते हैं भगवान की शरण में चले जाते हैं। देश का कोई ज्योतिषी वही गुरु,अल्लाह या जीसस की शरण में कभी गया हो तो हमें पता नहीं। कहने का आशय ये है कि जिस देश में कार्यपालिका,विधायिका और न्यायपालीका तक भगवान के भरोसे काम करती हो उस देश में आखिर ज्योतिषियों का तम्बू कौन उखाड़ सकता है ? इन्हें तो  सर्वदलीय समर्थन हासिल होता है।  किसी भी दल   की सरकार हो कोई इनके खिलाफ जाने वाला नहीं है। क्योंकि सभी की दुकानदारी  में ज्योतिष की अहम भूमिका है।

आप मुझे ज्योतिष शास्त्र कहें या विज्ञान कहें का विरोधी न माने ।  निंदक न मानें। मुझे तो अपने सनातन ज्ञान पर गर्व है। इसी के चलते सहमत न होते हुए मै जिस अखबार में काम करता था उसके पंडित जी यदि किसी दिन भविष्यफल भेजने में आलस करते थे तो मैं खुद उनकी और से भविष्यफल लिखकर छाप लेता था ।पाठकों का मन जो रखना होता था।   मैने जिस स्थानीय न्यूज चैनल में काम किया उसके दर्शकों के लिए खुद कंठीमाला पहनकर ज्योतिषी की भूमिका अदा की।आजकल चैनलों में अभिनय ही तो प्रधान है।  आखिर जनता की आँखों में धूल ही तो झोंकना है नेताओं की तरह। जनता की आँखों में धूल झोंकना सबसे आसान काम और सबसे अधिक ललितकला है। इसलिए आप भी मेरे कहने से  752  साल बाद बने इस सौभग्यशाली मुहूर्त की अनदेख न करें। खरीदारी करे। क्रेडिट कार्ड से करें ,परसनल   लोन लेकर करें ,कढ़ुआ[ कर्ज लेकर ] काढ़कर करें। खरीदारी जरूर करें ,क्योंकि इसी से तो आपका भाग्य चमकने वाला है।  जय श्री राम

@ राकेश अचल

करवा प्रधान महिलाओं का देश भारत

 

भारत कृषि प्रधान देश बचा है या नहीं लेकिन भारत ' करवा ' प्रधान देश अवश्य है ।  इस देश में महिलाएं भी करवा प्रधान हैं।  महिलाओं का आपने पति और बच्चों के प्रति समर्पण न केवल परिवार को बल्कि बाजार को भी लगातार शक्ति प्रदान कर रहा है।  मुझे लगता है कि  यदि भविष्य में भारत की अर्थ व्यवस्था 5  ट्रिलियन की हुई तो इसमें हमारी लोकप्रिय सरकार कि साथ ही  हमारी करवा प्रेमी महलाओं का बड़ा हाथ होगा।

दरअसल न होते हुए भी और शादी-शुदा मर्दों की तरह मै भी एक ' करवा ' हूँ ।  करवा मिटटी का भी होता है और शक़्कर का भी । करवा आजतक नमक का नहीं बना। करवा पति का प्रतीक है। इसमें एक टोंटी भी होती है ।  आजकल करवे ब्रांडेड आने लगे हैं ,इसलिए कुम्हारों के करवों पर ठीक वैसा ही संकट मंडरा रहा है जैसा भारत और कनाडा के रिश्तों पर।  संयोग से अभी करवा  उद्योग पर   ए-1 ,ए -2  की नजर नहीं  पड़ी अन्यथा करवा भी ,कभी का इनका हो गया होता किसानों की मंडियों की तरह। ए-1  और ए-2 कोई भी चीज बेचने का हुनर जानते है।  वे  किसी दिन मुल्क बेचने लग जाएँ तो हैरान मत होइएगा।

बहरहाल बात करवा और उससे जुड़ी चौथ की हो रही है ।  इस महानतम और पवित्रतम यानि पाकीजा व्रत का सृजक कौन है ,मै नहीं जानता ।  जानने की कोशिश भी की लेकिन जान नहीं पाया ।  वेद-पुराण मैंने पढ़े नहीं हैं और ' गूगलेश्वर  ' भी इस व्रत के बारे में उतना ही जानते हैं ,जितना की मै।  इस कथा के बारे में किसी दिन फुर्सत  में अपने अनुज मनोज श्रीवास्तव से पूछूंगा। वे चिर विद्वान सेवानिवृत नौकरशाह हैं और आज भी सरकार की सेवा कर रहे हैं। मैंने अपनी माँ को भी करवा चौथ   का व्रत करते देखा है जबकि मुझे पता था कि  उनकी उनके करवे से जीवन भर अघोषित अनबन रही।  गांव में मैंने किसी को करवा चौथ का व्रत करते नहीं देखा था ।  कम से कम बूढी हो चुकी सुहागिन महिलाओं को तो बिलकुल नहीं। फिर भी उनके करवे शतायु होते दिखाई दिए। हालाँकि जिन देशों की महिलाएं ये कठिन व्रत नहीं करतीं उनके करवे भी लम्बी  उम्र पाते  हैं।  

भारत की महिलाओं को अपने पति और संतान   की फ़िक्र सरकार से भी ज्यादा होती है।  वे अपने पति की लम्बी उम्र के लिए केवल करवा छठ का ही नहीं बल्कि तीज का भी व्रत करतीं है।  संतान के लिए संतान सप्तमी का व्रत है।  महिलाएं कभी तुलसी पूजती हैं तो कभी आंवला। पुरुषों को इन सबकी परवाह करते कभी देखा नहीं।  हमारे महान विद्वानों ने लगता है कि  पुरुषों के लिए ऐसे कठिन व्रत रचे ही  नहीं। आखिर ये व्रत कथाएं रचने वाले भी तो पुरुष ही  है।  वे क्यों किसी लफड़े में पड़ने लगे। वे पुजना जानते हैं लेकिन पूजना नहीं जानते या पूजना नहीं चाहते।

देश में मेरे जन्म से पहले टीवी नहीं आया था और मेरे युवा होने तक टीवी की पहुँच भी कम थी और वो रंगीन भी नहीं था,इसलिए करवा चौथ व्रत पर भी इसका कोई असर नहीं हुआ था, किन्तु जब से टीवी की पहुँच सेटेलाइट   के जरिये टीवी सेट्स से भी आगे मोबाइल के जरिये दूर-दूर तक पहुंची  है ,तब से करवा चौथ व्रत भी रंगीन ही नहीं बल्कि संगीन हो गया है।  करवा चौथ   से ठीक पहले टीवी  हो या मोबाईल ,अखबार हों या पत्रिकाएं करवाप्रेमी महिलाओं के लिए हीरे से लेकर सोने तक के आभूषण की नयी रेंज  परोसना शुरू  कर देते हैं। साडी वाले साड़ियां ,घड़ियों वाले घड़ियां लेकर ऐसे ललचाते हैं कि  बेचारे करवे का बजट ही बिगड़ जाता है।  यदि खरीदारी न करवाए तो उसका अपनी पत्नी के प्रति प्रेम संदिग्ध हो जाता है ,क्योंकि विज्ञापनों [ जिंगल्स  ]की ' पंच लाइन ' ही होती है कि  - जो अपनी बीबी से करे प्यार ,वो खरीदारी से कैसे करे इंकार ' ?न खरीदो तो आफत और खरीदो तो डबल आफत।

पिछले कुछ वर्षों से मै देख रहा हूं कि  अब करवा चौथ पर सजने-सजाने की भी स्पर्धा शुरू हो गयी है ।  फेसियल से लेकर मेंहदी तक,सदियों से लेकर गहनों तक ये सजावट प्रतियोगिता चल रही है।  सरकार भले ही नौजवानों और नौजवानियों को रोजगार न दे पा रही हो लेकिन इस करवा छठ व्रत ने सरकार का काम कर दिखाया है। कभी-कभी शक होता है कि  इस सबके पीछे बाजार के साथ ही कहीं  अपनी सरकार भी तो नहीं खड़ी ?

समय के साथ करवा चौथ हो या तीज  या बिहार वाली छठ पूजा सभी का चरित्र तेजी से बदला है ।  अब देश के अनेक हिस्सों में पत्नी प्रेमी पुरुष खासकर नौजवान जिन्होंने प्रेम विवाह किया होता है वे अपनी पत्नियों के त्याग को देखकर करवा छठ के दिन खुद बहुद भी निर्जला व्रत रहने लगे हैं । ये काम हालाँकि शर्मा-शरमी और बेशर्मी के चलते शुरू हुआ है ,लेकिन हुआ तो है ।  हम इस शुरुवात का स्वागत करते हैं।  हमारे भीतर तो अपनी पत्नी जितनी कूबत नहीं की पूरे  दिन निर्जला रहा सकें ,इसलिए हमने कभी ये व्रत नहीं किय।  उलटे अपनी ' करवी ' से ही सुबह  की चाय  बनवाकर  पी  ली। चाय कोई ' अमरमूल ' [ बुंदेली  में अमृत  की जड़  ] नहीं है लेकिन इसकी  लत  देश के बहुसंख्यक  करवों और करवियों को भी है।  आजकल तो बच्चे भी चाय के शौकीन हो गए हैं।

मै महिलाओं यानी करवियों के इन तमाम व्रतों को देश की सबसे बड़ी अदालत में चुनौती देना चाहता हू।  मेरा मानना है कि  ये असंवैधानिक हैं।  इनका हमारे संविधान  में कहीं कोई जिक्र नहीं है। इसलिए इन पर महिलाओं के हित में रोक लगाईं जाये । दरअसल हाल ही में हमारी न्याय की देवी के हाथ से तलवार हटाकर संविधान की प्रति पकड़ाई गयी है ,इसलिए मुझे लगता है कि  अदालत इस नए विषय पर मेरी याचिका ग्राह्य कर सरकार को नोटिस दे सकती है। अदालत तो अदालत है ,हो सकता है कि  मेरी याचिका उसी तरह ख़ारिज कर दे जिस तरह ईवीएम के बारे में दायर तमाम याचिकाओं को खारिज किया जा चुका है। आखिर कौन सी अदलात होगी जो अपने पांवों पर कुल्हाड़ी मारना चाहेगी  ।  अदालतों  में भी तो बहुसंख्यक करवे ही आसीन होते है।  वकील भी करवे हैं और माननीय जज साहिबान भी करवे ही है।  अपने-आपने घर में सभी पूजे जाते हैं। कम से कम 365  दिन में करवा चौथ और तीजा के दिन तो उनकी भी पूछ-परख होती है।

हमने पता है कि  हमारी धर्मभीरु सरकार नारियों के लिए बने इस तरह के तमाम तीज -त्यौहारों का विरोध नहीं कर सकत।  सरकार सनातनी है।  सरकार नारी शक्ति वंदन  करताी है।  सरकार तो उलटे व्रती महिला कर्मियों को ही नहीं बल्कि उनके पतिओं कोभी इस दिन छुट्टी दे देती है ।  सरकार छुट्टी न भी दे तो कैलेंडर छुट्टी करा देता है।  सब  जानते हैं कि इन कठिन व्रतों के लिए महिलाओं को अवकाश देना कितना पुण्य का कार्य है ।  मानवाधिकारों का इन व्रतों से कुछ लेना  देना नहीं है भले ही शरीर में पानी की कमी से व्रती महिलाओं के प्राणों को कोई संकट ही पैदा क्यों न हो जाये ? हमने तो छठ पूजा और करवा छठ पर श्रीमती रेवड़ी देवी को ही नहीं  हमारी पूर्व विदेशमंत्री सुषमा  स्वराज को भी व्रत करते और नख-शिख सजते संवरते देखा है।

पतियों की लम्बी उम्र कि लिए व्रत रखने वाली विदुषियों कि प्रति मेरी पूरी सहानुभूति है ।  मै समस्त सुहागिनियों का सम्मान भी करता  हूँ ।  मै उनका भी आभारी हूँ जिन ज्वेलर्स और पार्लर वालों ने करवा  चौथ व्रतधारी महिलाओं कि लिए मुफ्त में मेंहदी शृंगार  और चाय-नाश्ता की व्यवस्था की है। कम से कम करवों का कुछ तो पैसा बचा  ! मेरी उन करवों कि प्रति भी हार्दिक सहानुभूति है जो करवा चौथ कि दिन या इसकी पूर्व संध्या पर हजारों रूपये  से कटे। मै अपनी महिला पाठकों से भी विनम्रतापूर्वक अग्रिम क्षमा याचना करता हूँ और निवेदन करता हूँ कि  वे मेरे विचारों को लेकर उद्वेलित न हों । आखिर मै भी तो किसी का करवा हूँ।

@ राकेश अचल

9 मार्च 2022 का राशिफल


मेष राशि 

व्यापारी वर्ग के लिए समय उत्तम रहेगा। सरकारी कामों में आपको सफलता मिलेगी। यह समय आपके लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है इसलिए इसे बेकार की बातों में नष्ट न करें। आपके लिए बेहतर होगा कि आप अपने काम पर पूरा फोकस करें। स्वास्थ्य सुख में सफलता मिलेगी। जोखिम व जमानत के कार्य टालें। क्रोध व उत्तेजना पर नियंत्रण रखें। लंबे समय से रुके हुए कार्य पूरे होने लगेंगे। बेवजह की चिंता से बचें अन्यथा आपकी परेशानियां बढ़ सकती है।

वृष राशि 

आज आपका कोई छुपा विरोधी आपको ग़लत साबित करने की पुरज़ोर कोशिश करेगा। किसी धार्मिक यात्रा का प्रोग्राम बन सकता है। किसी के विवाह की रूपरेखा बनेगी। उलझे हुए काम सुलझाने के लिए स्थितियां आपके फेवर में हो सकती है। काम में मन नहीं लगेगा। कुसंगति से हानि संभव है। नौकरी में कार्यभार बढ़ सकता है। समाज संबंधी कार्यों पर अपना विशेष ध्यान केंद्रित रखेंगे। पारिवारिक मामलों में सावधानी बरतें।

मिथुन राशि 

भाग-दौड़ या मानसिक परेशानियां खत्म हो सकती हैं। थोड़ी इनकम बढ़ेगी। दफ्तर के कार्यों को लेकर आज आपको काफी व्यस्त रहेंगे। आप समय पर अपने सभी काम पूरे कर पाएंगे। हालांकि खुद पर काम का ज्यादा दबाव डालने से बचें नहीं तो आपकी सेहत में गिरावट आ सकती है। आपकी कामयाबी में वृद्धि होगी, संपर्क स्थापित होंगे और आप कुछ प्रभावशाली लोगों से भी मिलेंगे। प्रेम में विवाह की परिणती के मार्ग मे आने वाली बाधाएं समाप्त होंगी।

कर्क राशि 

आज आपकी धार्मिक कार्यों में श्रद्धा बढ़ेंगी। अपनी मेहनत और कार्य क्षमता पर विश्वास बनाए रखें। जल्दबाजी के स्वभाव को जितना जल्द त्याग देंगे उतना बेहतर होगा। साथी के साथ गलतफहमियां बढ़ने से आपके रिश्ते मे तनाव आ सकते हैं। आप अपनी सोच और स्वभाव में बदलाव लाकर रिश्ते में खोई मिठास वापस ला सकते हैं। गुड़ से बनी चीजों का दान करें। बिजनेस में कोई कार्य सिद्धि हो सकती है।

सिंह राशि 

आज आप उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करेंगे। थोड़ी सी मेहनत से ही पूरा फल मिलने की उम्मीद है। स्वास्थ्य समस्याओं में राहत मिलेगी। घर में सामंजस्य रहेगा जिससे आप खुश रहेंगे। ध्यान केंद्रित कर चीजों को अपने पक्ष में करने का अच्छा मौका है। आप विरोधियों का मुकाबला करने में सक्षम होंगे। व्यापारियों को आज ठोस लाभ कमाने की संभावना है। यदि आपने किसी को पैसा उधार दिया था, तो वह वापस मिल सकता है।

कन्या राशि 

आज आपका पारिवारिक वातावरण आनंद व उल्लास से लबालब भरा रहेगा। व्यापारिक मामलों में सोच-समझकर ही आगे बढ़े। विद्यार्थी वर्ग पढ़ाई करते समय अधिक फोकस करें, क्योंकि इस समय एकाग्रता भंग होने के कारण बनते हुए कार्य भी बिगड़ सकते हैं। नौकरी करने वाली महिलायें समय का प्रबन्धन अवश्य करें अन्यथा बॉस से सहयोग की उम्मीद न करें। यात्रा के कार्यक्रमों पर अचानक फैसले लेने से बचें तो आपके लिए अच्छा रहेगा।

तुला राशि 

आज आपके लिए दिन सामान्य रहेगा। लेन-देन और निवेश के मामलों में नई प्लानिंग करेंगे। पेशेवर मोर्चे पर आप बहुत मेहनत करेंगे और उनमें उपलब्धियां भी हासिल करेंगे। यह कामना पूर्ति का दिन होगा। रचनात्मकता आपके दृष्टिकोण और रणनीति में बदलाव कर सकती है। बॉस आपकी परफॉरमेंस से खुश होकर आपको कोई अच्छा-सा गिफ्ट दे सकते हैं। आपको धन कमाने के नए अवसर मिल सकते हैं। आपके बच्चे की बीमारी चिंता का कारण हो सकती है।

वृश्चिक राशि 

किसी जरूरी काम में जीवनसाथी की सलाह लेना फायदेमंद रहेगा। ऑफिस में मन की इच्छा के विरुद्ध किसी की जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी, इसलिए धैर्य के साथ कार्यों का निर्वाह करें। युवा वर्ग अनजान व्यक्ति की बातों में आने से बचें। प्राइवेट जॉब करने वाले लोगों के लिए आज का दिन फायदेमंद है। आपके सोचने के तरीके में भी बदलाव के योग हैं। धार्मिक कार्य में मन लग सकता है। स्टेशनरी से जुड़े व्यापारियों को लाभ मिलता नजर आ रहा है।

धनु राशि 

आज कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। मौके का फायदा उठाने के सिलसिले में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। पेशागत जरूरतें पूरी करने में परिवार का साथ मिलेगा। आज आप में से कुछ की रचनात्मकता चरम सीमा पर होगी। धन संबंधी मामलों को समझदारी से निपटाया जाना चाहिए। व्यापार में धन लाभ के योग बन रहे हैं। फालतू दिखावे से परहेज करेंगे। कार्यों को समय पर पूर्ण करना अच्छा रहेगा।

मकर राशि 

दिन उत्तम रहने वाला है। आप योजना बनाने और उसे लागू करने के मूड में रहेंगे। नए संपर्क विकसित होने की संभावना है और आप सामाजिक और व्यावसायिक समारोहों में भी शामिल होंगे। आप नौकरी से जुड़े किसी भी काम में कोई बड़ा फैसला लेना चाहते हैं तो ले लें। किसी कन्फ्यूजन के खत्म होने की भी संभावना है। कारोबार में आई सभी मुश्किलें दूर होने के योग बन रहे हैं। निद्रा अपूर्ण रहने से मानसिक परेशानी हो सकती है।

कुंभ राशि

स्टूडेंट्स के लिए दिन बेहतर रहेगा। आर्थिक क्षेत्र में स्थिरता रहेगी। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। प्रॉपर्टी के लिए अच्छा ऑफर मिलने वाला है। आपकी पसंद का सौदा तय हो सकता है, या फिर इस सिलसिले में चला आ रहा कानूनी विवाद खत्म हो सकता है। शाम को बच्चों के साथ अच्छा टाइम बीतेगा। शांति से अपने कार्यों के प्रति समर्पित रहें। कोर्ट कचहरी के चक्कर लगा सकते हैं। उद्देश्यपूर्ण यात्रा संभव है। जीवनसाथी से भावनात्मक लगाव बढ़ेगा।

मीन राशि 

आज धार्मिक यात्रा का योग बन रहा है। दुश्मनों पर जीत मिल सकती है। आपको कोई बड़ी सफलता मिलेगी साथ ही कार्यक्षेत्र में भी आपका प्रदर्शन उम्मीद से अच्छा रहेगा। जो लोग बेरोजगार उन्हें ऑनलाइन पैसे कमाने का मौका मिलेगा। आपके जीवन में आपको नई सफलता मिलने के योग हैं। कारोबार में ज्यादा तरक्की करते हुए नजर आने वाले हैं। आय के नए स्त्रोत विकसित हो सकते हैं। कपड़े के व्यापार में उम्मीद से अधिक लाभ मिलेगा।

8 मार्च 2022 का राशिफल


 मेष राशि

आज आपके घर में कोई व्यक्ति आपकी मदद कर सकता हैं। सार्वजनिक जीवन में मान-प्रतिष्ठा की वृद्धि होगी। प्रोपर्टी से जुड़ा काम करने वाले जातकों के लिए आज का दिन लाभदायक रहेगा। आज जीवनसाथी के साथ आप ज्यादा समय बिताएंगे। अपने माता-पिता को सच बताएं, फैसला आपके पक्ष में होगा। उद्यमियों के लिए समय शुभ है। आपका रुका हुआ काम पूरा होगा और आपको अच्छा फायदा होगा। पारिवारिक जीवन में सुख और शांति बनी रहेगी।

वृष राशि 

आज दांपत्य जीवन में कहीं ना कहीं मतभेद तथा रुठना-मनाना चलता रहेगा। लक्ष्य प्राप्ति के लिए प्रयत्न और अधिक बढ़ाने होंगे। खुद के प्रति अधिक जागरूक होंगे। ऑफिस में माहौल को प्रसन्नता पूर्ण व तनाव मुक्त करके रखना होगा जिससे की सभी के कार्य में मन लगें व त्रुटि होने की भी कोई गुंजाइश न रहें। आप की मनोकामनाएं पूर्ण होंगी। आप किसी के साथ वैवाहिक संबंध स्थापित करने से पूर्व भली-प्रकार सोच-विचार कर लें।

मिथुन राशि 

परिवार के लोगों को आपसे बहुत अपेक्षाएं रहेंगी। आप पर जिम्मेदारियां बढ़ सकती है। भूले-बिसरे साथियों से मुलाकात होगी। दफ्तर में वरिष्ठ अधिकारी आपके प्रदर्शन से असंतुष्ट नजर आएंगे। बेहतर होगा आप उन्हें शिकायत का मौका न दें। व्यापार से जुड़े जातकों की अटकी हुई डील पक्की हो सकती है। व्यापार-व्यवसाय ठीक चलेगा। विवाद को बढ़ावा न दें। अगर आप कोई बड़ा खर्च करने के मूड में है तो इसके लिए दिन अनुकूल नहीं है।

वृश्चिक राशि 

आज आपके जीवन की सभी प्रकार की परेशानियां दूर हो जाएंगी। अपनी सोच सकारात्मक बनाए रखें और फिजूल की बातों में ना पड़ें। अगर आप किसी नये काम की शुरुआत कर रहे हैं तो पूरा दिन व्यस्त रहने वाले हैं। सामाजिक लोकप्रियता के चलते आप आकर्षण का केंद्र बनेंगे। आपका पारिवारिक जीवन शांतिपूर्ण और खुशहाल रहेगा। बेझिझक आगे बढ सकते हैं। कोई नई बीमारी से कष्ट हो सकता है। संतान के करियर संबंधी किसी चिंता का समाधान होगा।ù

धनु राशि 

आज निजी कार्यों में आपका समय बीतेगा। समय आपके पक्ष में बना हुआ है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि बगैर किसी प्रयास के आप हर मोर्चे पर सफलता प्राप्त कर लेंगे। परिवार और दोस्त खुशी के समय और यादगार अवसरों को मनाने के लिए इकट्ठा होंगे। आज आप खुद को तरोताजा महसूस करेंगे। आपके राज सार्वजनिक हो सकते हैं। प्रोफेशन में अपनी गतिशीलता को बनाए रखने के लिए प्रयास के साथ-साथ लोगों से संपर्क-सूत्र बनाए रखने होगें।

मकर राशि 

आज मन में कुछ उतार-चढ़ाव रहेंगे। आपकी ख्वाहिश पूरी होने के योग हैं। किसी पारिवारिक समस्या को शांति के साथ सुलझाने में सक्षम साबित होंगे। बिजनेस से संबंधित किसी काम में आप अपने पिता की मदद लेंगे। किसी प्रोजेक्ट मे शामिल होने से पहले उससें अच्छी तरह समझ लें। अगर आपने अपने गुस्से पर काबू नहीं रखा तो आपके घर का माहौल बिगड़ सकता है। उन परिस्थितियों में पड़ने से बचें जिनमें आप असुविधा महसूस करते हैं।

कुंभ राशि 

आज आप दोस्तों के साथ बेहतरीन वक़्त बिताएंगे, लेकिन गाड़ी चलाते वक़्त ज़्यादा सावधानी बरतें। नौकरी के सिलसिले में यात्रा पर जा सकते हैं। जीवनसाथी संग घूमने जाने की योजना बन सकती है। आपको घरेलू मोर्चे पर कुछ तनाव और वैचारिक मतभेद के दौर से गुजरना पड़ सकता है। आप में थोड़ी झुंझलाहट भी हो सकती है। यदि कोई कानूनी मामला लंबित है तो आज आपको सफलता मिल सकती है। शारीरिक दृष्टि से आपकी हेल्थ फिट रहेगी।

मीन राशि 

आज आपको अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखने की ज़रुरत है। कर्ज लेने में संकोच रहेगा। फालतू कामों व बातचीत में समय नष्ट करने से बचें। किसी के प्रति दिल में बसी भावना का इजहार करने का सही मौका मिल सकता है। जरूरत पड़ी तो पैसों की मदद भी आपको मिल सकती है। अपनी प्लानिंग को बचा कर रखें, आपके लिए अच्छा रहेगा। आपको जिस अवसर की पिछले कई दिनों से तलाश थी वो किसी करीबी की मदद से आपको मिल जायेगी।

अधिक मास :18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक

तीन साल में एक बार आने वाला भगवान श्री विष्णु का प्रिय अधिकमास, मलमास या पुरुषोत्त मास इस बार 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक रहेगा। पंचांग के मुताबिक मलमास या अधिक मास का आधार सूर्य और चंद्रमा की चाल से होता हैं सूर्य साल में 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता हैंवही चंद्रमा साल में 354 दिनों माना गया हैं इन दोनों वर्षों के दिन 11 दिनों का अंतर होता हैं यही अंतर तीन साल में एक महीने के बराबर हो जाता हैं इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास पड़ता हैं व इसी को मलमास भी कहा जाता हैं अधिकमास के अधिपति स्वामी भगवान श्री हरि विष्णु माने जाते हैं परुषोत्तम भगवान का ही एक नाम हैं इसलिए अधिकमास को पुरूषोतत्तम मास के नाम से जानते हैं हिंदू धर्म शास्त्रों में इस महीने में जगत के पालनहार श्री विष्णु की पूजा का कई गुना फल प्राप्त होता हैं।
आपको बता दें कि पुरुषोत्तम मास के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर नित्य नियम से निवृत हो श्वेत या पीले वस्त्र धारण करें और पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके किसी भी ताम्र पात्र में पुष्प बिछाकर शालिग्राम स्थापित करें। फिर जल में गंगाजल मिलकर भगवान विष्णु का ध्यार करते हुए स्नान कराएं।इसके बाद शालिग्राम विग्रह पर चंदन लगाकर तुलसी पत्र सुगन्धित पुष्प, नैवेद्य, फल अर्पित करें। शक्ति ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करने के उपरान्त कपूर से आरती करें अभिषेक के जल को स्वयं और परिवार के सदस्यों को ग्रहण कराएं। इसी के साथ श्रीमद्भागवत कथा गीता का पाठ, श्री विष्णु सहस्ननाम का पाठ पुरुषोत्तम मास में करने से विशेष फल की प्राप्ति होती हैं।


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1एप्रिल 2025, मंगळवारचा पंचांग

* सूर्योदय:-* 06:12 दुपारी   * सूर्यास्त:-* 18:37 दुपारी  * श्रीविक्रमासावत -2082* शेक -1947  *श्री वीरातिवाना संवत- 2551*  *सूर्य*: - सूर्य...